बीएस3 गाड़ियों की बिक्री पर 1 अप्रैल से लगी रोक के चलते ऐसी लाखों गाड़ियां अब कबाड़ में तब्दील हो गई हैं. इन गाड़ियों को अब न तो बेचा जा सकता है और न ही उनका रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है. ये बिना बिकी हुई गाड़ियां ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए एक बड़ा बोझ बन गई हैं और इन्हें बाजार में खपाने के लिए उनके पास विकल्प तकरीबन नहीं के बराबर हैं.
तीन दिन पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने बीएस3 गाड़ियों को और छूट देने से इनकार कर दिया तो इन गाड़ियों को बेचने के लिए ऑफरों की बारिश होने लगी. पिछले दो दिन में तमाम गाड़ियां बिकी भीं लेकिन बताया जाता है कि अब भी लाखों की संख्या में ऐसी गाड़ियां हैं जो अनबिकी हैं, इन्हें ठिकाने लगाने के लिए कंपनियों के पास अब सिर्फ दो रास्ते हैं.
-पहला रास्ता ये है कि कंपनियां इन गाड़ियों की तकनीक में बदलाव कर उन्हें बीएस4 के मानक तक ले जाएं ताकि इन्हें मार्केट में बेचा जा सके. हालांकि ये काफी खर्चीला साबित होगा और गाड़ियों की लागत बढ़ने पर उनकी कीमत भी बढ़ेगी इसलिए ऑटो कंपनियां इस विकल्प को आजमाने की स्थिति में नहीं हैं.
-जबकि, दूसरा रास्ता इन गाड़ियों को विदेश ले जाकर उन देशों में बेचने का है जहां के पॉल्यूशन मानक बीएस3 लेवल या उससे कम के हैं. ऐसे कई देश हैं जहां इन गाड़ियों को खपाया जा सकता है. देखना होगा कि ऑटो कं
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